Javed Akhtar 17 January 1945 -

Comments (6)

SIR I AM BIG FAN OF YOU
wah wah wah wah wah... bas likhta he jaou wah wah.. kuch aise aap ke andaz hai.. Javed akhtar sahab.. hats off to you sir.. I am glad to have experienced the magic of your thoughts.. truly magnificent.. 💜
Below mentioned lines are your or not. Please confirm ज़िन्दगी के इस कश्मकश मैं वैसे तो मैं भी काफ़ी बिजी हुँ , लेकिन वक़्त का बहाना बना कर , अपनों को भूल जाना मुझे आज भी नहीं आता ! जहाँ यार याद न आए वो तन्हाई किस काम की, बिगड़े रिश्ते न बने तो खुदाई किस काम की, बेशक अपनी मंज़िल तक जाना है , पर जहाँ से अपना दोस्त ना दिखे वो ऊंचाई किस काम की!!!😊
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