LS (16th march 1994 / Rajgarh M.P., India)

ऊड़ान

जहाँ हो तकदीर का आशिया,
वहाँ पंछी उड़े या
उड़ जाये छुले ऊचाईयाँ,
हो अरमानो का साथ
खुली हवाओं के दरमिया,
या कट कर गिर जाये पर
ऊचाँ लगे सारा जहां,
बदले जब तकदीर तदबीर से
रोके ना रोक सके कोई,
हूँ मैं आजाद परिंदा,
हूँ मैं आजाद परिंदा!
सिमट गई मुश्किले सारी
मिल गई मजिंल यही,
है मेरा ठिकाना,
यही मेरा ठिकाना!

by Larika Shakyawar

Comments (2)

The real measure of success is the amount of hardship required to succeed.........beautifully expressed by you..
larikaji very nice poem..........