हम अनजाने में अचानक आ मिले हैं,

Poem By Dr. Navin Kumar Upadhyay

हम अनजाने में अचानक आ मिले हैं,
आपस में प्यार के फूल खिले हैं,
बचना होगा काँटों से हमेशा,
जो बहुरुपिए बन आ घुल-मिले हैं।

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हम पगला गये।

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कब लग जाओगे गले,
यह सोच अब रुला रही।।

सिया, झूलन पधारहु

कहत राम रघुबर, सिया, झूलन पधारहु।
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हे भोले, महादेव, हे बाबा!

हे भोले, महादेव, हे बाबा!
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हे रे प्यारे, हम घूमे बहुत परदेश,

हे रे प्यारे, हम घूमे बहुत परदेश,
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काली नगरिया काली माटी,
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