सोचा था नया साल सुनहरा रहेगा

ये सोचा था नया साल सुनहरा रहेगा
नही था पता दर्द गहरा रहेगा
किसी और के हम होते भी कैसे
तेरी यादों का दिल पे पहरा रहेगा

उस मुसाफिर को मंज़िल मिल न सकेगी
जो रास्तों में ही
ठहरा रहेगा
हँसीं है नज़ारे तो
किस काम के है
मेरी नज़रों में तेरा ही
चेहरा रहेगा
सोचा था नया साल सुनहरा रहेगा
नही था पता
दर्द गहरा रहेगा।

by Ahatisham Alam

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