नयनों के इशारे

नयनों के इशारे, बने जीवन सहारे,
प्यार भींगेअश्क मोती अनमोल हैं।
तेरी तिरीछे चितवन जिय की धड़कन,
पलक गिरने-उठने गति छबि अतौल हैं।।
दृग से मिले दृग, आँखें चार, आमने-सामने,
मन गति बन गईं तब, बिल्कुल डाँवाडोल है।
'नवीन' तेरी तस्वीर जब उतर गई जिगर मेरे,
रुप की चाँदनी ने दिये, सब रहस्य अब खोल हैं।।

by Dr. Navin Kumar Upadhyay

Comments (1)

कविता में दो प्रेमियों के सुखद मिलन और उससे उत्पन्न अनुराग और आवेग का बहुत सुंदर वर्णन किया गया है. ....दृग से मिले दृग, आँखें चार, आमने-सामने, मन गति बन गईं तब, बिल्कुल डाँवाडोल है।