आज युवतियाँ चढ़ गईं अपने अटारी हैं,

आज युवतियाँ चढ़ गईं अपने अटारी हैं,
छलनी ओट.ले, आसमाँ चाँद निहारी हैं।
सजी-धजी, विविध आभूषण सजीं नारियाँ,
सोहते गले के हार, कँकण करतीं खनखनियाँ,
बजतीं कमरधनी धुनि, पायल बजतीं रुनझुनियाँ,
आसमान ओर तकती बार-बार,
प्रियतम की प्यारी हैं, छलनी ओट ले आसमाँ निहारी हैं।
अधरन अरुणिम शोभते, चमक रहे बसन चमाचम,
सिर सुभग केश सजे, जूड़े बँधे शोभते न कभी कम,
करतल मेंहदी सजी शोभती, बुलाती अपने प्रियतम,
हाथों में थाल सजे शोभते,
बुलाती शोभती सँवरी मनहर प्रियतमा प्यारी है,
छलनी ओट ले आसमां निहारी है।
चँदा को ओट ले देखा, साजन ओर नजर किया,
चाँद को दिखा-दिखा, अपने पिया अँक सँवरण किया,
आसमान की ओर देख, 'नवीन'मनुहार किया,
करतल ललाई देकर चँदा को शर्म से लाल किया,
पायल की रुनझुन ने नभ ओर मचाई शोर महकारी है।

by Dr. Navin Kumar Upadhyay

Comments (1)

Looking towards sky amazing love can be felt. Wisely penned poem is shared here.10