हम कब मिले, कैसे, कहाँ मिले

Poem By Dr. Navin Kumar Upadhyay

हम कब मिले, कैसे, कहाँ मिले,
मुझे तो तनिक भी याद नहीं।
कैसे मुझे तुमसे प्यार हो गया,
जब कहीं कोई, तुमसे बात नहीं।।
हम दोनों मिल गए जहाँ अचानक,
लिया हाथ हँसकर, अपने हाथों में।
दोनों हाथों रख अपने कँधे पर,
भर लिया तूने, मुझे अपनी बाहों में।।
अचानक पूछ बैठे, तुम नजर मिला,
क्यों अबतक, नहीं पहचाना मुझको।
जिसे तेरी हर धड़कन-मुस्कन पुकारती
नहीं पहचान पाये अबतक उसको?
छोड़ो सब कुछ, झाँक लो मेरे नयनों में,
तब अपने को, तुम पहचान पाओगे ।
जुदा नहीं रह सकोगे कभी तुम मुझसे,
'नवीन' मेरे पूरे बदन, लिपट समा जाओगे।।

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