फिर एक दाग

Poem By Sharad Bhatia

फिर एक दाग

आज फिर हिन्दुस्तान के माथे पर दाग लग गया
क्यूंकि एक और निर्भया का फिर से चीर हरण हो गया

क्यूँ भूल जाते हो तुम अपनी मर्यादा
क्यूँ भूल जाते हो कि तुमने भी किसी नारी के अंश से वंश लिया

क्या तुमने कभी अपनी माँ, बहन का चीरहरण किया
फिर क्यूँ तुम भूल जाते अपने संस्कार

जो बार - बार सिखाती माँ, तुम्हें जरा भी लाज नहीं आयी
जब तुम मेरे शरीर से कर रहे थे बलात्कार
क्या तुम्हारी आँखों के सामने तुम्हारी माँ, बहन की तस्वीर नहीं आई

मैने क्या बिगाडा था तुम्हारा
कि चंद काम वासना की खातिर तुम मुझे छील गए
मेरी जुबान को काट कर मुझे पूरा तोड़ गए

कहा गए वो संस्कार जो माँ ने सिखाये
चंद सुख की खातिर तुम मेरा कतरा - कतरा रोंद गए

अब कौन करे इंसाफ
अब कौन सी माँ जन्मे"लक्ष्मी "
अब वो भी डरेगी,
मुझे पैदा करने पर कँपेगी

Comments about फिर एक दाग

feel so sad at rape and brutal murder. no words to write... real 10 फांसी दो, फांसी दो गुरूवार, १ अक्टूबर २०२० जहां नारी असहाय है और जुल्म की बोलबाला है डॉ जाडीआ हसमुख
बहुत सही कहा आपने वैसे तो हम दावा करते हैं कि हम चांद पर पहुंच गए और कुछ ही समय में मंगलयान और मंगल पर भी फतेह पा लेंगे लेकिन अफसोस यह सब किस काम का जब हम अपनी मां और बहनों के सम्मान के लिए कुछ भी नहीं कर सकते यह बड़े दुख की बात है और हमें मिलकर सोचना चाहिए । 100***
Apne samaj ka kadwa saach ki aab asise bhi loog baag hain jo maryada jante he nahi. Very well reflected social evil eating our society. Thank-you.
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा प्रशासन और सरकार द्वारा कितनी गंभीरता से अमल में लाया जा रहा है, किसी से छुपा नहीं है. न ही सोच बदलने की दिशा में कोई पहल या प्रगति दिखाई देती है. यही कारन है की सब कुछ पहले की भांति जारी है. आपने पूरे देश की ओर से व्यक्त किये गए उदगार के लिए आभारी हम सब आभारी है.


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