ऐसा लगता क्यू मुझे

ऐसा लगता क्यू मुझे

ऐसा लगता क्यू मुझे
सूरज उगता तुझे निहारने ।
हवा बहता तुझे छेडने
और मेघ बरसता तेरी बदन चूमने ।

कहकर तो देख तू मुझको
तोहफा क्या दूँ, मैं तुझको ।
चाँद सितारे लाकर मैं
तेरी कदम पे रख दू ।

दिया जला दिया तेरी नाम से
मेरे मन-मदिंर की चौखट पर ।
गूंज उठेगा मेरी दिल की हर धड़कन
तेरी हीं नाम लेकर हरदम ।

कोहीं ना छिने तुझको, मुझसे
तड़पता ये दिल, सोचके ऐसे ।
बनुगा में खुद तेरी परछाई
छूपालुगा मैं तुझको, तेज धूप से ।

पता नहीं शाश्वत क्या हैं
सौदंर्य की प्रतीक, जब तू बनी
ढूढने लगा मैं, अमरत्व तुझमे
दीवाना बना मैं, तेरी प्यार में ।

by Tulsi shrestha
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