मिट्टी के घर में रहते थे इंसान खो गए

मिट्टी के घर में रहते थे इंसान खो गए।
पोख़तह मकान होते ही पत्थर के हो गए।
माँ बाप के लिए है खुला वृद्धा आश्रम।
ख़िदमत करेगा कौन वो सत्तर के हो गए।

- नादिर हसनैन

by NADIR HASNAIN

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