प्रकृति के सानिध्य से

Poem By pushpa p. parjiea

वो गुनगुनाती सी हवाएं
दिल को बहलाते जाएँ

करे हैं मन की अब
हम यहीं रुक जाएँ


चारो और फैली हरियाली मन ललचाये
शमा में फैली ठंडक मन को भा जाये

ऊँचे ऊँचे पर्वत के शिखर
बादलों संग मिलकर गीत गाये


कल कल करते बहते झरने
अनंत शांति का संदेश सुनाये

प्रकृति की गोद से मानो
भीनी भीनी खुशबु आये

वन्य जीवन के प्राणी देख
दिल एक सवाल कर जाये

जाती इनकी बर्बरता की
फिर भी ये कितनी सिद्दत से

कैसे अपना धर्म निभाए
पेट भरा हो तब बब्ब्बर शेर

भी, हिरन का शिकार
किये बिना ही चले जाये

इससे मानव को ये सन्देश है मिलता
न बन आतंकी न बन अत्याचारी

तुझे दी है ईश्वर ने समझ की दौलत
तो चलता चल अपना धर्म निभाये...

Comments about प्रकृति के सानिध्य से

Nature is very beautiful. Wind blows and gently touches mind and heart. Giving very pleasant sound streams flow. Without hunting a lion still goes far leaving deer. This nature gives beautiful message to human beings not to be cruel. Nature tells to give affection to all. This is very thoughtful and nice poem shared here.10
मनुष्य की हिंसक प्रवृत्ति पर यह एक सुंदर कटाक्ष है जिस आपने पूरी कविता और विशेष रूप से निम्नलिखित शब्दों में बयान किया है: इससे मानव को ये सन्देश है मिलता न बन आतंकी न बन अत्याचारी धन्यवाद, बहन पुष्पा जी.


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