हे भोले, महादेव, हे बाबा!

Poem By Dr. Navin Kumar Upadhyay

हे भोले, महादेव, हे बाबा!
जब तू घुमत बाड़ डगरिया में,
तब हम कहाँ जाईं मँदिरिया में।
पीअर पीअर पहिने तू सबमें जना ला,
काँधे पर काँवर लिए सब जगह दिखा ला,
दौड़त तू, देखत बानि हम, जब डगरिया में,
तब हम कहँवा जाईं मँदिरिया में।
बोल-बम नाम मुँह में बोलत दिखा ला,
अँखियन में अँसुवा भरल हमरा दिखा ला,
धीमे-धीमे चलत दिखा ल, डगरिया में,
तब हम कहाँ जाईं मँदिरिया में।
काँधे अँगोछा पर.काँवर रखल दिखा ला,
आह-उह-आह करल, लँगड़ात दिखा ला,
तबौ न कोर-कसल छूटत बा, दौड़े में डगरिया में
तब हम कहाँ जाईं मँदिरिया में।
कहीं गोड़वा में पट्टी बँधल, कहीं सुस्ता ला,
तब भी न धीरज छूटत, हरदम सधल दिखा ला,
चैन न मिलत कभी, कैसे घुसे जल्दीे मँदिरिया मे,
तब 'नवीन'कहाँ जाईं मँदिरिया मेंं।

Comments about हे भोले, महादेव, हे बाबा!

I am from Gorakhpur and I know Bhojpuri, I really enjoyed this poem.


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