हे नारद! तुम भलो का जानिहौ

Poem By Dr. Navin Kumar Upadhyay

हे नारद! तुम भलो का जानिहौ, नहीं कहुँ व्याह करन तुम पाये।।
देखी एक कन्या परम सुकुमारी, विष्णु भगवान संग सो गयो भगाये।।
रहयो अब तक कुँआरे ऋषि, नहीं कोउ जननी दुख समुझ पाये।
सुता कहँ जो है जानत पालत, सोई सुता दुःख सुख समुझ पायो।।

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हे भोले, महादेव, हे बाबा!

हे भोले, महादेव, हे बाबा!
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