हम एक बार जो आ गए,

Poem By Dr. Navin Kumar Upadhyay

हम एक बार जो आ गए,
दोबारा न लौटने आए हैं।
जिसे जो भी लेना, ले लो,
बस मुहब्बत सौगात लाए हैं।।

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हम पगला गये।

नींद नहीं आ रही मुझे,
निशा मुझे तड़पा रही।
कब लग जाओगे गले,
यह सोच अब रुला रही।।

सिया, झूलन पधारहु

कहत राम रघुबर, सिया, झूलन पधारहु।
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घन घटा काली कजरारी आई, उमड़ि घुमड़ि गर्जत, तुम    न डरावहु।
चातक ताकत स्वाति इक बूँद  कहुँ, तुजम चकोरनि बनि सुख सरसावहु।

हे भोले, महादेव, हे बाबा!

हे भोले, महादेव, हे बाबा!
जब तू घुमत बाड़ डगरिया में,
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पीअर पीअर पहिने तू सबमें जना ला,

हे रे प्यारे, हम घूमे बहुत परदेश,

हे रे प्यारे, हम घूमे बहुत परदेश,
अब ले चल अपने देश।
काली नगरिया काली माटी,
कोऊ कर नहिं है धवल, देव! वेश।

Rudyard Kipling

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