हम करते गुमान

Poem By Dr. Navin Kumar Upadhyay

हम करते गुमान अपने ज्ञान पर,
लेकिन अनजान रहते हैं,
हम न समझ पाते अपनीदुनिया,
सदा अज्ञान पालतेहैं
समझ से परे परम सत्य तत्त्व,
हम न कभी ध्यान देते हैं,
लेकिन दिल में बस हम भान का केवल शान रखते है।

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हम पगला गये।

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हे भोले, महादेव, हे बाबा!

हे भोले, महादेव, हे बाबा!
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Rudyard Kipling

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