हम करते गणपति पद वन्दन।

Poem By Dr. Navin Kumar Upadhyay

हम करते गणपति पद वन्दन।
सब बिधि मँगल करन देव, सकल सिद्धि सुभग सदन ।
गौरी नँदन धारे वेद, लेखनी, दर्शन मँगल सुखमय शरण।
सकृत प्रणाम सुख शान्ति दाता, मुक्ति भुक्ति देत नमन।
ज्ञान प्रदायक, सब सुख कर लायक, मँत्रण सह करैं वन्दन।
वाणी रमा प्रियवर प्रभुवर, परमानंद सुख सदा रहैं मगन।
"नवीन"कृपा कीजिए हे देव! रहौं सदा तव पद कर चँदन।

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हे भोले, महादेव, हे बाबा!
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