मैंने देखा इक झलक,

मैंने देखा इक झलक,
नयन बीच समा गये,
झपक की राह,
दिल में आ गये,
अब छटपटाते क्यों,
रहते क्यों न अँदर,
आँसुओं को पकड़
निकलना चाहते बाहर!

by Dr. Navin Kumar Upadhyay

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