मजार में जाने तक बची रहती ख्वाहिश,

मजार में जाने तक बची रहती ख्वाहिश,
यदि खत्म हो गया यह,
समझ लो ख़ुदा खुद ही आ गया।

by Dr. Navin Kumar Upadhyay

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