परम आनँद मग्न वसँत,

परम आनँद मग्न वसँत,
सुधि नहीं लेत प्यारे कँत,
उसाँस गर्म भरत अनँत,
देख रहे परम प्रियवर पँथ ।

by Dr. Navin Kumar Upadhyay

Comments (0)

There is no comment submitted by members.