वन-उपवन बापिका-तड़ाग,

वन-उपवन बापिका-तड़ाग,
जागे सबके अनुराग-भाग,
मनावन चाहत सब सुहाग,
बढ़ते जा रहे तान-राग।

by Dr. Navin Kumar Upadhyay

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