धीर नहीं मन कहुँ परत,

धीर नहीं मन कहुँ परत,
आपुन तन -सुधि भूलत,
नयन चहुँ ओर तकत,
कोऊ तो कहुँ नहिं लखत।

by Dr. Navin Kumar Upadhyay

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