हे मधुकर सरस!

मधुर-मधुर बरसत रस,
वातावरण शाँत मोदमय रस,
आ जा प्रियतम! अब तू बरस,
कर ले मधुरस पान, हे मधुकर सरस!

by Dr. Navin Kumar Upadhyay

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