मनोज बढ़ावत मदन भाव

मनोज बढ़ावत मदन भाव,
सुरनारि सब बूड़त नवल चाव,
उमगत आनँद उर भर किलोल ठाँव,
करत व्याकुल हिय बनावत घाव।

by Dr. Navin Kumar Upadhyay

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