कुसुम कँदुक सम खेलत उमँग भरि,

कुसुम कँदुक सम खेलत उमँग भरि,
झूमि-झूमि नाचत सब आनंद करि,
पुरजोर हाहाकार करत काम भरि,
गगन होत निनाद जय जय रतिपति करि।

by Dr. Navin Kumar Upadhyay

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