मलयवत समीर लेत उमँग बहार,

मलयवत समीर लेत उमँग बहार,
तनिक न फुहरत घन फुहार,
शोभा मधुमय अपार,
सुमन करते लता से प्यार।

by Dr. Navin Kumar Upadhyay

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