कुसुमित नागकेशर पत्र,

कुसुमित नागकेशर पत्र,
लिख्यो आजु अनँग पत्र,
आ जा, आ जा, मेरे मित्र,
अत्र न कोऊ कलत्र।

by Dr. Navin Kumar Upadhyay

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