वरुण वृक्ष फूलि भरत,

वरुण वृक्ष फूलि भरत,
रतिपति जिय पर मरत,
वियोगिन देव दुख करत,
सदा दुख पेखि हहरत।

by Dr. Navin Kumar Upadhyay

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