गोप-गोपी समाज जुड़ि आयो,

गोप-गोपी समाज जुड़ि आयो,
राधेकृष्ण मनहरण सुहायो,
देखि-पेखि मन जुड़ाये सबके,
आजु वसँत मनमोहक आयो।

by Dr. Navin Kumar Upadhyay

Comments (0)

There is no comment submitted by members.