लागि गई गोपी-ग्वाल भीड़ अपार,

लागि गई गोपी-ग्वाल भीड़ अपार,
रास लगि लूटन सुख बहार,
देखि-पेखि ग्वालिन टोली,
अनँग मचायो पुरजोर होली।

by Dr. Navin Kumar Upadhyay

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