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मुहब्बत की शरुआत ही

मुहब्बत की शरुआत ही

Poem By Dr. Navin Kumar Upadhyay

मुहब्बत की शरुआत ही होती है मौत से,
न ही बच जाता अपना घर -सँसार।
न ही रहता अपना दिल-मिजाज,
बच जाता केवल आँसुओं के धार।।

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Edgar Allan Poe

Annabel Lee

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