नीलासूक्त(भावानुवाद)

नीलासूक्त(भावानुवाद)
हे आदित्य देव! हम करते प्रणाम, आपको बारँबार।
कृपा करें, हे देव! बहे अखिल जगत घृत-स्नेह धार।।
सँसार मे होता रहे, पुण्यमय परम प्रेम पय का विस्तार।
करता 'नवीन'प्रणाम पुन: पुनः, कर दें नयन करुणा कटाक्ष सार।।
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पीतवर्णा महालक्ष्मी दबातीं चरण, नीलबदन सुषमा सुकुमार।
नीलदेवी बन दर्शत पूजिता, जय जय जय नमस्कार।।
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हम करते प्रणाम पुनः पुनः, विष्णु भार्या नील नाम्ना।
धरा गगन आधार दायिनी, मँगल परम पावना।।
कीजिए करुणा कृपापूणा^नयन कोर, मिले तव अनुराग भक्ति।
हम सब अखिल जगत पायें, प्रेममय परा तव पद रति।।
दृढ़ सँकल्पित बने जीवन, मधुमय मँगल सुहावना।
बृहस्पति गुरुदेव कृपा करें, मिले अविचल करुणा।।
मातरिश्वा बने उदार, महामँगल अँक सुखदायिनी।
पवन देवता कृपा करें, सुरभित समीर प्रवाह कारिणी।
सब देव मिलकर कृपा कीजिए, बने सबका जीवन मँगल।
'नवीन'हरि पद रति पावै, निहाल बन जाये जीवन सकल।।
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Nkupadhy
5Jan2018

by Dr. Navin Kumar Upadhyay

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