कभी नहीं मैंने जिनको देखा,

कभी नहीं मैंने जिनको देखा,
वे सपने में क्यों आ जाते हैं ।
आकर लिपट-लिपट कर रो,
बिस्तर भी गीले कर जाते हैं।।
आँखें खोल-खोल कर देखता,
नजर नहीं आता कहीं भी कोई।
ऐसी भी क्या मँशा बची उनकी,
अपनी तमन्ना पूरी कर जाते हैं।।
कई बार मैंने भी पूछ दिया उनको,
क्यों दुनिया के सामने न आ जाते।
"नवीन"इशारे से ही बात करते वे,
मुँह पर हाथ बस भले रख जाते हैं।।

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