कई लोगों के पोस्ट पढ़े हमने,

कई लोगों के पोस्ट पढ़े हमने,
जो गलतियां हुई हमसे,
इस साल,
कर देना
माफ मेरे भाई!
बुरा न मान लेना कोई,
पढ़ा था जब,
बहुत मजा आया,
आज कैसे हो गया,
अचानक,
हृदय परिवर्तन!
अरे भाई!
कैसी खता!
भई! मैं तो माफी
न कभी माँगने वाला;
हाँ!
इतना जरुर चाहूँगा,
यदि सजा है देनी,
तो
सजा दो
बस इतनी ही,
कि
अपने
दिल के कैदखाने में,
जिन्दगी भर
बाँध कर रखना,
कभी न
बाहर की हवा लगने देना,
इससे बढ़कर
और सजा
क्या हो सकती,
भला!

by Dr. Navin Kumar Upadhyay

Comments (0)

There is no comment submitted by members.