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बीते दिनों की बातों

कुछ अवशेषों को यूँ ही छोड़ आए हम
गलियारों के सफर में भूल आए हम
बीते दिनों की बीती बातों को
जीवन के अध्याय में उत्कीर्ण कर आए हम।

by Papeya Dubey

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