बिखर सा गया है

कल तक जो उमड़ सा रहा था
वो अश्क़ों का सागर भर सा गया है

मेरे पास आके मुझे रूह दे दो
कोई कह रहा था मर सा गया है।

तेरी चाहतों में ये टूटा है इतना
मेरा दिल अबतो निखर सा गया है।

जो गिरता तो खुद ही संभल जाता ये आलम
सम्हाला भी तो कुछ ऐसे कि बिखर सा गया है।

by Ahatisham Alam

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