हम करते अभिनँदन नमन, महादेवी,

Poem By Dr. Navin Kumar Upadhyay

हम करते अभिनँदन नमन, महादेवी,
साज सज पधारेंगी तुरँत अभी-अभी।
जगत अधिष्ठात्री देवी निवास करें,
निज करुणा नयन न मूँदें कभी।।
जिन दया कृपादृष्टि महिमा पाकर,
हम पायें सब सुख वैभव विमल सँतति।
"नवीन"परम तत्व युगल चरण रज पावैं
हम पा सकें अविरल भगति रति।।

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हम पगला गये।

नींद नहीं आ रही मुझे,
निशा मुझे तड़पा रही।
कब लग जाओगे गले,
यह सोच अब रुला रही।।

सिया, झूलन पधारहु

कहत राम रघुबर, सिया, झूलन पधारहु।
सावन हरित मास वर्ष बाद आयो, हरित हरित होई तुम        हरषावहु।
घन घटा काली कजरारी आई, उमड़ि घुमड़ि गर्जत, तुम    न डरावहु।
चातक ताकत स्वाति इक बूँद  कहुँ, तुजम चकोरनि बनि सुख सरसावहु।

हे भोले, महादेव, हे बाबा!

हे भोले, महादेव, हे बाबा!
जब तू घुमत बाड़ डगरिया में,
तब हम कहाँ जाईं मँदिरिया में।
पीअर पीअर पहिने तू सबमें जना ला,

हे रे प्यारे, हम घूमे बहुत परदेश,

हे रे प्यारे, हम घूमे बहुत परदेश,
अब ले चल अपने देश।
काली नगरिया काली माटी,
कोऊ कर नहिं है धवल, देव! वेश।

Pablo Neruda

If You Forget Me