Always On My Mind

Poem By aliyah aliyah

हम उनसे उनकी ही बात करते हैं कि
हम तुमको याद करते हैं
लेकिन तुम खत क्यों नहीं लिखते;
उनने हँसकर कहा,
हम तेरे लिए सजकरअपना श्रृँगार करते हैं।

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हम पगला गये।

नींद नहीं आ रही मुझे,
निशा मुझे तड़पा रही।
कब लग जाओगे गले,
यह सोच अब रुला रही।।

सिया, झूलन पधारहु

कहत राम रघुबर, सिया, झूलन पधारहु।
सावन हरित मास वर्ष बाद आयो, हरित हरित होई तुम        हरषावहु।
घन घटा काली कजरारी आई, उमड़ि घुमड़ि गर्जत, तुम    न डरावहु।
चातक ताकत स्वाति इक बूँद  कहुँ, तुजम चकोरनि बनि सुख सरसावहु।

हे भोले, महादेव, हे बाबा!

हे भोले, महादेव, हे बाबा!
जब तू घुमत बाड़ डगरिया में,
तब हम कहाँ जाईं मँदिरिया में।
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हे रे प्यारे, हम घूमे बहुत परदेश,

हे रे प्यारे, हम घूमे बहुत परदेश,
अब ले चल अपने देश।
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कोऊ कर नहिं है धवल, देव! वेश।