एक तुम ही न पूछोगे, बताओ, तुम हो कौन!

मुझे क्या बँधना दुनिया की जँजीरों में,
हम तो कसकर बँधे तेरी ही नजरों में,
निकलने का रास्ता भी नहीं मालूम मुझे,
बाहर झाँक कर देखना चाहते भी नहीं।
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अब आ गए तेरे पास, कहीं जाने का न चाहता मन,
तुम ही बन गए हो अब मेरे जीवन सव^स्व -धन,
कहाँ जाऊँ मैं अब तेेरे दरवाजे को छोड़कर,
लुट गया देख कर तेरा बस निर्मल सहज वचन।
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अब जाऊँ कहाँ मैं, मुझे सँभालेगा अब कौन?
तुम ही तो मेरे सब कुछ, अब निबाहेगा कौन?
जहाँ भी जाऊँगा, लोग पूछेंगे तुम हो कौन?
एक तुम ही न पूछोगे, बताओ, तुम हो कौन!

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Bahut Khoob, Pyar bhari kavita.10