MKB (03/07/1991 / )

आओ अब कुछ बात करे

आओ अब कुछ बात करे,
कदम कुछ अब साथ भरे।
भुला के सारे गिले शिकवे,
नये रिश्ते की शुरुआत करे।
पहले ही बहुत कम है जिंदगी,
फिर रुठ के क्यो वक्त बरबाद करे।
बंजर हो गया था जो पतझड़ के आने से,
उस गुलशन को प्यार से फिर आबाद करे।
भुल गया हूं मै तुम भी भुला दो,
बीती जिंदगी को क्यों हम याद करे।
आओ अब कुछ बात करे,
कदम अब कुछ साथ भरे।
भुला के सारे गिले शिकवे,
नये रिश्ते की शुरुआत करे।
आओ अब कुछ बात करे…………………

अनुराग

by Mahesh kumar Boss

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Comments (5)

very nice lines......keep writing
cute and nice poem sir! beautiful lines and lovely poem!
Beautiful lines.. N very true too.
धन्यवाद
Waoo..that's so loving n touching