वाह! क्या बात है//

अमावस की रात है, दीयों का साथ है,
धरती दुल्हन बन बैठी, वाह! क्या बात है
खुशी है जजबात है, जश्न की रात है,
उजाले की जीत है, अंधेरे की मात है,
अमावस की रात है, दीयों का साथ है,
धरती दुल्हन बन बैठी, वाह! क्या बात है

ये दीवाली की रात है, मानो बरात है,
आशाओं के बादल से खुशियों की बरसात है,
तमसो मा ज्योतिर्गमया, अस्तो मा सद्गमया,
दीपों के होंटों से सुंदर सुंदर सौगात है,
अमावस की रात है, दीयों का साथ है,
धरती दुल्हन बन बैठी, वाह! क्या बात है,







©2014 Aftab Alam Khursheed. All rights reserved

by Aftab Alam

Comments (2)

Beautiful poem with fantastic flow of words..... अमावस की रात है, दीयों का साथ है, धरती दुल्हन बन बैठी, वाह! क्या बात है Waah kya baath hai! Beautiful presentation. Loved reading it.
kya baat hai, khub sunder, thanks.