कहो क्या हो, जो मेरा दिल तुम्हे मुमताज़ कह दे तो

कहो क्या हो, जो मेरा दिल तुम्हे मुमताज़ कह दे तो.
छुपाया अब तलक जिनको, वही सब राज़ कह दे तो
बहुत गुस्ताख़ है ये दिल, सनम तुम माफ़ कर देना
जो कहना था इसे कल तक, वही गर आज कह दे तो

''कवि अभिषेक ओमप्रकाश मिश्रा''

by Abhishek Omprakash Mishra

Comments (3)

Heart must say all the hidden secrets of mind about love and beauty. Yesterday's feelings should be said today. This poem is excellently penned. Thank you very much for sharing this.10
Ek bahut hi khoobsoorat kalam........................10
Bhut khoob Abhishekh likhte raho aur bhi behtar