ज़िंदगी

SHOBHA KHARE- -

लम्हे का भरोसा नहीं कब ज़िंदगी छूट जाये,
फिर क्यो मौत का डर दिल मे उबलता रहता है I


जानता है परवाना कि जल जाएगा उसके पहलू मे,
फिर क्यो शमा को देख कर वो मचलता रहता हैI

कुछ भी हो मगर जिंदिगी बड़ी दिलचस्प है दोस्तो,
मंज़िल वो ही पाता है जो हर हiल मे चलता रहता है I

हर ठोकर से मेरी मानो तो एक सबक सीखो दोस्तो, ,
एक इंसान ही तो है जो गिर गिरके समहलता रहता है I

by Shobha Khare

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