(july 27 1994 / California, but move around a lot.)

हम हार गये प्यार में (नये तेवर में)

तन-मन से हार गये हम तो प्यार में,
ख़ुद को भी बिसार गए हम तो प्यार में.

मुझसे मिला जो आईना कल सुबह दीवार पर.
कहने लगा क्यों हँस रहे हो यार अपनी हार पर.
मित्रों,
इससे पहले मैं उसे सच्चाई बताता
वह अपने अंदाज में बोला –
हारकर भी मुस्करा रहे हो
क्या गम है जो छिपा रहे हो?
मैनें कहा - आईने ये दिल की बात है,
ये प्यार का फलसफा है.
तूं क्या समझेगा नामुराद,
ये दुनिया जानती है तूं बेवफा है.
दिलवालों से खफा है.
तूं तो महज लोगों का चेहरा देखता है.
उन्हें आईना दिखाता.
और उन्हें उनकी औकात बताता है.
अरे, कभी किसी दिल में भी झांक
उसमें प्यार की गहराई को आंक.
फिर तेरा दृष्टिकोण ख़ुद-ब-ख़ुद बदल जाएगा
और तूं हार कर भी मुस्कराएगा.
खैर...................अब गीत शुरू करते हैं –

मुझसे मिला जो आईना कल सुबह दीवार पर.
कहने लगा क्यों हँस रहे हो यार अपनी हार पर.
मुझको मिला है मीत मेरा मेरी हार में,
तन-मन से हार गये हम तो प्यार में.

तूफां का डर नहीं अब तूफां ही सहारे हैं,
वो दिल से चाहते हैं वो दिल से हमारे हैं.
साहिल से करके तौबा हम चल दिये मझधार में,
तन-मन से हार गये हम तो प्यार में,


हर कर भी जीत गए हम तो अहले प्यार को,
पा गए जी पा गए हम तो अपने यार को.
मंज़िल मिली है मुझको मुहब्बत के कारबार में,
तन-मन से हार गये हम तो प्यार में,

उपेन्द्र सिंह ‘सुमन’

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Comments (3)

A good read. We are a part of the whole. meaning we are part of each other.
I think that 'Cosmic Dreamer' understated that comment; this poem is a wonder to a lone soul. Someone out there will take this as motivation. If you can read some of my poems and you'll see what I mean. -Warner
I think we are all part of each other making up a wonderful whole... Nice poem...