Kavita Se Pyar Hua (Hindi)कविता से प्यार हुआ

मुझको कविता से प्यार हुआ।


भाव भरे मन ये व्याकुल, कविता जनने को हर बार हुआ।
मैं रीझ गया हूँ भावों पर, मुझको कविता से प्यार हुआ।
शब्दों के फूल किया अर्पण, सपना मेरा साकार हुआ,
कविता की खातिर फिर तो ये, जीवन अपना न्यौछार हुआ।
मुझको कविता से प्यार हुआ।

देते शब्दों के फूल पिरो कर, कविता का बेजार हुआ।
उसकी महक शराब बन गयी, और नशा दिल के पार हुआ।
शब्दों के वो फूल पिरोये, पहन रखा हूँ माला सी मैं,
वो है चमन गुलों की मेरी, मैं फूलों का बाजार हुआ।
मुझको कविता से प्यार हुआ।

रहना उस बिन एक पल भी मुश्किल, अगर नहीं दीदार हुआ।
सोच डुबाये रहती गहरे, सिर पर चिंता का भार हुआ।
दिल मेरा उसमें है बसता, वो बसती है दिल में मेरे,
साथ निभाता हरदम मेरा जो, पक्का वो तो यार हुआ।
मुझको कविता से प्यार हुआ।

(C)एस. डी. तिवारी

by S.D. TIWARI

Comments (2)

Jeez Jimi, no-one ever cut me like that one. That one hit a deep deep target.
Impressive, introspective, and very well written. The thought/idea is an eye opener and cause the reader to reflect, particularly the last lines. 10++++ Cynthia