(January 7,1988 - September 17,2078 / Columbus, OH)

मेरी छाया

मेरी छाया
मूल कवि: रॉबर्ट लुई स्टीवेंसन
हिंदी अनुवाद: रजनीश मंगा

मेरी नन्ही सी छाया है जो साथ मेरे आती जाती है,
पता नहीं मुझको कि कितनी काम हमारे वो आती है,
सिर से ले कर पाँव तलक; वो मुझ जैसी बन जाती है
मेरे बिस्तर पर मुझसे पहले कूद के वो चढ़ जाती है.

मजेदार बातें हैं उसकी, कद काठी में चलती उसकी,
बच्चों जैसी नहीं कि जिनकी, ऊँचाई है धीरे बढ़ती;
कभी तो वह लंबी हो जाती जैसे खींचा गया रबड़ हो,
सिमटे तो लघु हो जाती जैसे उसका सर न धड़ हो.

बच्चे खेला कैसे करते इसका है न आभास उसको,
मुझे मूर्ख न सिद्ध करे यह आता है न रास उसको,
वह पीछे मेरे चिपकी रहती हाय है डरपोकन कितनी
अगर छुपूं आया के पीछे शर्म मुझे आ जाती कितनी

एक दिवस, प्रातः वेला में सूर्योदय से पहले यह देखा,
ओस कणों में भीग रही थी वह पीले फूलों की रेखा,
पर मेरी अलसायी छाया बोझिल जैसे हो उनींद में,
बिस्तर पर पड़ते ही छाया मुझसे पहले गई नींद में.

by Rajnish Manga

Comments (1)

Sometimes it is, sometimes not, depends on where you are at any one time. And who you're with. Still, this one did make me think......Nice one, Erica. Love, Fran xx