Khayalon Ke Samandar (समंदर)

Poem By pushpa p. parjiea

कभी ख़ुशी कभी ग़म दे जाती ये खयालो की दुनिया
कभी पुरानी यादों की बारात ले आती ख़यालों की दुनिया
कभी आँखों में खुशियों के सपने भर जाती खयालों की दुनिया
कभी खोकर अतीत के झरोखों में छलक जाती आँखे बह जाते आंसू
कभी याद आती नन्ही सी प्यारी सी अपनी सी वो दुनिया
कभी हम भटकते ख़यालों की बंजर जमीं पर...
कभी उड़ते पंख लगा के पंछी बनते गगन पर
कभी तैर के जाते बहते ख़यालों के समन्दर
खयालो में जब तुम एकबार आ ही जाते
कभी तब हम खुद को ही भूल से भी जाते
वो जीवन की सरिता, जहाँ थी वो ममता थी खयालो की गरिमा
खयालो की दुनिया जहा बस ही यूं जाये, जी जाएँ हम, कभी हंसें.. कभी मुस्कुराएं.

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