ऐसा लगता क्यू मुझे

ऐसा लगता क्यू मुझे

ऐसा लगता क्यू मुझे
सूरज उगता तुझे निहारने ।
हवा बहता तुझे छेडने
और मेघ बरसता तेरी बदन चूमने ।

कहकर तो देख तू मुझको
तोहफा क्या दूँ, मैं तुझको ।
चाँद सितारे लाकर मैं
तेरी कदम पे रख दू ।

दिया जला दिया तेरी नाम से
मेरे मन-मदिंर की चौखट पर ।
गूंज उठेगा मेरी दिल की हर धड़कन
तेरी हीं नाम लेकर हरदम ।

कोहीं ना छिने तुझको, मुझसे
तड़पता ये दिल, सोचके ऐसे ।
बनुगा में खुद तेरी परछाई
छूपालुगा मैं तुझको, तेज धूप से ।

पता नहीं शाश्वत क्या हैं
सौदंर्य की प्रतीक, जब तू बनी
ढूढने लगा मैं, अमरत्व तुझमे
दीवाना बना मैं, तेरी प्यार में ।

by Tulsi shrestha
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by Tulsi Shrestha

Comments (10)

It's one of the few poems that brings me to tears.
I won an oratory contest reciting this many years ago can’t remember what grade but it was in our reader.
I love this poem because my grade 9 literature teacher read it so beautifully I'll never forget. I'm 70 now. That's a great teacher!
One t'ing dat double-jointed leetle Bateese will be is a sitter for Ireland's Got Talent
When I was in Grade six, my teacher, as a form of discipline, made me memorize and recite this poem before the class. I did it. Never forgot the poem. In fact, on my 60th birthday, a friend from those years gave me a copy of Leetle Bateese, with a note: Remember.
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