जानकी चरण-वन्दन

जानकी चरण-वन्दन
स्वण^आभूषण विभूषित,
त्रिलोक तेज पुँज देदीप्यमान ।
श्रीरघुबर म़ानसी इष्ट देवता,
अरुणवर सौंदर्य शोभायमान ।।
भव सँताप त्रिताप शमन हित,
जन अभय लेते जिन युगल चरण।
हे भामिनी! कमल सम आभा लिए,
'नवीन' उन पाद पद्मों की लेत शरण।।

by Dr. Navin Kumar Upadhyay

Comments (2)

I loved this poem a lot sir True picture of what is going on in indian politics
For increase in salary It is unanimous bogey With one stroke They have cake Laluji: -Mr. Lalu Prasad Yadav Chief architect behind fodder scam