बसता हैं अपना भारत

बसता हैं अपना भारत
हमारे दिल में, दिमाग में
खून के हर रग-रग में
हमरी जिन्दा सांसों में
हमरी प्रबल विसवासों में
बसता हैं अपना भारत
हर कण कण में
हमरे तन मन में
बसंती पवन में
खेत खलिहान में
वन और पहाड़ में
सिंह के दहाड़ में
बसता हैं अपना भारत
हमरे घर घर में
सरे शहर में
हर एक गाँव में
पीपल की छाव में
बसता हैं अपना भारत
वेड और पुराण में
बाइबिल और कुरान में
महाभारत और रामायण में
मस्जिदों और मंदिरों में
चर्चों और गुरुद्वारों में
बुद्ध और महावीर में
गुरुनानक और कवीर में
बसता हैं अपना भारत
बैलों की घुंघरू में
औरतों की आबरू में
देवों की मूर्ति में
भक्तों की भक्ति में
हर नर नारी में
भक्त और पुजारी में
फलों की महक में
चूड़ियों की खनक में
बसता हैं अपना भारत

रंगों की होली में
उमंगों की टोली में
दीपों की दिवाली में
हर एक गली में
ईद और मुहर्रम में
गुरुपर्व और क्रिसमस में
भांगड़ा और डांडिया में
कत्थक और डिस्को डांस में
बसता हैं अपना भारत
चिड़ियों की चहक में
फूलों की महक में
दुन्लन की डोली में
सास की बोली में
मधुर मुस्कान में
नजरों की जुबान में
विधाता स्वरुप पिता में
माँ की ममता में
दादी की दुलार में
बहन के प्यार में
बसता हैं अपना भारत
उत्तर और दक्षिण में
पूरब और पश्चिम में
पर्व और त्योहारों में
नदी और पहाड़ों में
संतों की महफ़िल में
जनमानस के दिल में
बसता हैं अपना भारत
शशिकांत निशांत शर्मा ‘साहिल'

by Shashikant Nishant Sharma

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