पंगा

हमने जो शासन के कुशासन के खिलाफ अवाज उठाई,
शासन के अघिकारी हरकत मे गये और हमारे
से बोले आपने शासन से पंगा लेकर अच्छा नही किया 11
सभी लोग रिशवत देकर अपना सरकारी काम करवाते,
हमने भी अपना करवाने के लिए रिशवत की पेशकश की
हमे कया पता अघिकारी ईमानदार है तो लो यहाँ भी हो गया पंगा 11
कर की चोरी बडे पेमाने पर करते, हमने सोचा कयो ना
हम भी कर बचा ले पर कर हमारी बचत पर कर अघिकारी
ने नोटीस दे दिया फिर कया हमने सोच लिया हम तो लेकर रहेगे पंगा
थक के हमने थोडा केश के साथ थोडी ऐश कर ले,
पर लोगो को लगा की हम ऐश के साथ ऐश कर रहा हुँ
फिर वही भयकर हो गया पंगा 11
हमारे साहस तो देखे, जिससे नेता और अभिनेता डरते है
हमने उस से भी हो गया झूठे और पैसे लेकर समाचार छापने पर
उन लोगो ने चिड कर दो लोग हमारी जासूसी के लिए लगा दिए,
हर रोज बस मै आ जाते है पर उनको
पता नही हग तो उनसे भी पंगा लेने को तेयार है 11

by Ajay Srivastava

Comments (6)

I am glad that I learned about this author. Her work is refreshing. Sara
That last line is poetry defined.
Powerful imagery, and stirs the emoitions. Loved it.
Shows how in touch with nature were the poets back then. Beautiful description! I also liked the rhyming style (abab cdcd efefef) , akin to how Shakespeare wrote. To me it seems the poet has put in extra effort when it is rhymed.
Nature and man in harmony immerse grief with a sigh of relief as the waves of sea do on a night poet knows pretty well to say in this beautiful sonnet!
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